हरियाणा के 52 शहरों में 500 सेक्टर का मास्टर प्लान, अनियमित कॉलोनियों पर गिरेगी गाज
- By Gaurav --
- Friday, 27 Feb, 2026
Haryana to have a master plan for 500 sectors in 52 cities, crackdown on unregulated colonies
हरियाणा में अनियमित कॉलोनियों के तेजी से फैलते जाल पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक शहरी पुनर्गठन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अवैध प्लॉटिंग, बिना बुनियादी सुविधाओं के विकसित हो रही बस्तियों और अनियोजित शहरीकरण की समस्या से निपटने के लिए 12 शहरों में नए आवासीय सेक्टर विकसित किए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत पहले चरण में करीब 40 हजार एकड़ भूमि पर विकास कार्य प्रस्तावित है, जिसके लिए भूमि प्रबंधन की जिम्मेदारी Haryana Shehri Vikas Pradhikaran (HSVP) को सौंपी गई है।
विधानसभा में जल्द होगा विस्तृत ऐलान
मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini अगले दो से तीन दिनों में विधानसभा के भीतर इस योजना का विस्तृत प्रारूप प्रस्तुत करेंगे। सरकार का मानना है कि यदि अधिकृत और योजनाबद्ध सेक्टर पर्याप्त संख्या में उपलब्ध होंगे, तो लोग अवैध कॉलोनियों की ओर आकर्षित नहीं होंगे।
राज्य में बढ़ती आबादी, शहरी विस्तार और आवासीय मांग को देखते हुए यह निर्णय रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जनप्रतिनिधियों के दबाव में तेज हुई प्रक्रिया
नए सेक्टर विकसित करने की मांग लंबे समय से विधानसभा के भीतर और बाहर उठ रही थी। जनप्रतिनिधियों का तर्क था कि अधिकृत कॉलोनियां नहीं बनने के कारण आम नागरिक मजबूरी में अवैध प्लॉट खरीद लेते हैं।
समालखा से भाजपा विधायक Manmohan Singh Bhadana ने प्रश्नकाल के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि केवल समालखा ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में अनधिकृत कॉलोनियां इसलिए पनप रही हैं क्योंकि नियोजित सेक्टर विकसित नहीं किए जा रहे।
उनकी मांग थी कि सरकार जल्द से जल्द अधिकृत सेक्टरों की संख्या बढ़ाए ताकि नागरिकों को वैध विकल्प मिल सकें।
पहले चरण में इन 12 शहरों पर फोकस
सरकारी सूत्रों के अनुसार पहले चरण में जिन शहरों में सेक्टर विकसित किए जाएंगे, उनमें शामिल हैं—
समालखा, नरवाना, हांसी, होडल, पिहोवा, लाडवा, घरौंडा, पिंजौर, कालका, शाहबाद, तावडू और लोहारू।
इन शहरों का चयन जनसंख्या वृद्धि, भौगोलिक विस्तार और अवैध कॉलोनियों की स्थिति को ध्यान में रखकर किया गया है।
समालखा में तीन नए सेक्टर विकसित किए जाएंगे। इसके लिए ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से 498 एकड़ जमीन पहले ही खरीदी जा चुकी है। यह कदम दर्शाता है कि सरकार प्रारंभिक स्तर पर भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को गति दे चुकी है।
EWS के लिए 25 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव
विधायक मनमोहन सिंह भड़ाना ने यह भी सुझाव दिया कि नए सेक्टरों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 25 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। उनका तर्क था कि यदि स्थानीय जरूरतमंदों को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो पूंजीपति वर्ग प्लॉट खरीदकर ऊंचे दामों पर बेच देगा और वास्तविक लाभार्थी वंचित रह जाएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि EWS श्रेणी में आवंटित प्लॉट की पुनर्बिक्री पर प्रतिबंध होना चाहिए, ताकि यह योजना केवल निवेश का माध्यम न बन जाए बल्कि सामाजिक न्याय का साधन बने।
विपक्ष का समर्थन, लेकिन सख्ती की मांग
थानेसर से कांग्रेस विधायक Ashok Arora ने भी योजना का समर्थन किया, लेकिन साथ ही अवैध कॉलोनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि लोगों को सस्ते प्लॉट का लालच देकर ठगा जा रहा है। इन कॉलोनियों में न तो पक्की सड़कें होती हैं, न पेयजल आपूर्ति और न ही सीवरेज व्यवस्था। ऐसे में आम नागरिक आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तर पर नुकसान झेलते हैं।
विपक्ष का मानना है कि केवल नए सेक्टर विकसित करना पर्याप्त नहीं होगा; अवैध कॉलोनियां काटने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई भी अनिवार्य है।
52 शहरों में 500 सेक्टर का मास्टर प्लान
सरकार ने दीर्घकालिक योजना के तहत 52 से अधिक शहरों में लगभग 500 नए सेक्टर विकसित करने का खाका तैयार किया है। प्रदेश के 23 जिलों और 154 शहरों-कस्बों को ध्यान में रखते हुए यह व्यापक शहरी पुनर्गठन योजना तैयार की गई है।
राज्य को पांच जोन में विभाजित किया गया है—
गुरुग्राम जोन: गुरुग्राम, रेवाड़ी, धारूहेड़ा, सोहना, पटौदी, फरुखनगर
फरीदाबाद जोन: फरीदाबाद, नूंह, तावडू, होडल
पंचकूला जोन: पंचकूला एक्सटेंशन, पिंजौर, कालका, यमुनानगर, करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र
हिसार जोन: हिसार, हांसी, जींद, नरवाना, फतेहाबाद, टोहाना, उकलाना
रोहतक जोन: रोहतक, सोनीपत, पानीपत, झज्जर, बहादुरगढ़, खरखौदा, गोहाना
इन 500 सेक्टरों के विकास के लिए लगभग 1.46 लाख एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी। यह हरियाणा के शहरी परिदृश्य को अगले दशक में पूरी तरह बदल सकता है।
तावडू में ई-ऑक्शन दोबारा
तावडू के सेक्टर 7, 8 और 11 की ई-ऑक्शन प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाएगी। वर्ष 2008 में इन सेक्टरों के लिए 360 एकड़ भूमि खरीदी गई थी।
नूंह के विधायक Aftab Ahmed ने 2019 के बाद ई-ऑक्शन न होने पर सवाल उठाए। संबंधित मंत्री ने आश्वासन दिया कि प्रक्रिया शीघ्र दोबारा शुरू की जाएगी।
तीन बार बोली प्रक्रिया पूरी न हो पाने से यह संकेत मिलता है कि बाजार की मांग, मूल्य निर्धारण और निवेशकों की रुचि जैसे पहलुओं पर भी पुनर्विचार जरूरी है।
सरकार का दावा: संतुलित और पारदर्शी शहरीकरण
समाज कल्याण एवं अधिकारिता मंत्री Krishan Kumar Bedi ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि पहले चरण में 40 हजार एकड़ भूमि पर सेक्टर विकसित किए जाएंगे।
सरकार का दावा है कि योजनाबद्ध शहरीकरण से—
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अवैध कॉलोनियों पर अंकुश लगेगा
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आधारभूत ढांचा मजबूत होगा
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रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी
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आम नागरिकों को कानूनी और सुरक्षित आवास विकल्प मिलेंगे
यदि यह योजना निर्धारित समयसीमा में क्रियान्वित होती है, तो हरियाणा में शहरी विकास का नया मॉडल स्थापित हो सकता है।
अब निगाहें मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत किए जाने वाले विस्तृत रोडमैप पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि भूमि अधिग्रहण, आधारभूत संरचना, आवंटन प्रक्रिया और वित्तीय ढांचे को किस प्रकार लागू किया जाएगा। आने वाले महीनों में इस योजना की वास्तविक प्रगति ही तय करेगी कि क्या हरियाणा अवैध कॉलोनियों के संकट से स्थायी राहत पा सकेगा।